Introduction (परिचय)
Food Psychology: हमारी खाने की आदतों का असली खेल दिमाग में होता है
क्या आपने कभी सोचा है…
“मैं जानती हूँ कि यह चीज़ सेहत के लिए सही नहीं है…
फिर भी इसे खाने का मन क्यों कर रहा है?”
हम सबके साथ यह होता है…कभी रात में अचानक से चॉकलेट खाने की Craving…कभी काम के stress में तला-भुना खाने का मन…कभी बोरियत में बार-बार Kitchen के चक्कर…लगाना ! असल में यह भूख नहीं होती, यह दिमाग की तरकीब होती है।
इसी को समझने का नाम है —फ़ूड साइकोलॉजी (Food Psychology)
यानी खाना हम शरीर के लिए नहीं, ज्यादा तर दिमाग और भावनाओं के लिए खाते हैं। चलिए इस खेल को असली रूप में समझते हैं…
(1) भूख दो तरह की होती है — असली या नकली?
असली भूख (शारीरिक भूख)
• धीरे-धीरे लगती है
• जो भी खाना मिले खा लेंगे
• पेट भरने के बाद रुक जाते हैं
• शरीर को Energy चाहिए होती है
नकली भूख (Emotional Craving)
• अचानक से तेज Craving आती है
• सिर्फ कुछ ख़ास चाहिए — जंक, मिट्ठा, चाय आदि
• पेट भरा हो फिर भी मन न माने
• बाद में Guilt Feel होता है
अगली बार बस खुद से पूछें: “पेट भूखा है या मन?”
👉 जवाब मिलेगा — ज्यादातर हर बार मन ही भूखा होता है।
![]() |
| Emotional Hunger vs Real Hunger |
(2) Mood aur Emotions खाने को कंट्रोल करते हैं
ज़्यादा सोचने और स्ट्रेस की वजह से भी हमे भूख लगती है क्यूंकि जितना हम सोचते है उससे ज्यादा भावनाएँ हमारी प्लेट को चलाती हैं।
जैसे:
😔 उदासी → चॉकलेट
😫 काम का दबाव → नमकीन
😟 चिंता → जंक फूड
🥱 बोरियत → बार-बार कुछ खाना
😊 खुशी → Celebration Food
इसीलिए इसे कहा जाता है — Emotional Eating →हम खाने से नहीं…दिमाग से लड़ रहे होते हैं।
(3) दिमाग को Sugar और Junk क्यों पसंद है?
असल में जंक फूड में सबसे ज़्यादा क्या होता है:
- बहुत ज्यादा चीनी
- बहुत ज्यादा नमक
- बहुत ज्यादा तेल
ये तीनों दिमाग को तुरंत आनंद (मज़ा) देती हैं।यानि जैसे ही आप चॉकलेट या चिप्स खाते हैं — दिमाग के अंदर एक ख़ास “खुशी वाला पदार्थ” निकलता है: जिसे डोपामिन कहते है|
डोपामिन क्या करता है?
अब पहले तो जानेगे की डोपामिन करता क्या है ? ये आपके दिमाग को एहसास कराता है —
“वाह! यह खाने से मुझे बहुत खुशी मिली!” फिर दिमाग उस Moment को याद रख लेता है।
इसका मतलब:
-
पहली बार मीठा या जंक खाकर अच्छा लगा → दिमाग ने इसे Reward के रूप में Store कर लिया→ जब अगली बार Stress, Gussa, उदासी या Boredom होगा→ दिमाग उसी “खुशी वाले अनुभव” को दोबारा माँगेगा | इसीलिए Cravings आती हैं।
![]() |
| Dopamine-driven junk food cravings |
➡दिमाग एक आदत बनाता है — “फिर से खाने की”
दिमाग क्या करता है इसको एक silent cycle बना देता है:
- पहली बार मीठा खाया → अच्छा लगा
- अगली बार Mind बोला → “वही दो!”
- तीसरी बार → आदत बननी शुरू
- चौथी बार → Craving Control से बाहर
और आप सोचते हैं : “मुझे ये खाना बहुत पसंद है” असल में —दिमाग Addicted हो गया होता है।
➡पेट नहीं, दिमाग भूखा होता है
जंक फ़ूड में Nutrition कम होता है इसलिए शरीर को कुछ नहीं मिलता लेकिन दिमाग को “Instant Reward” मिल जाता है! इसका नतीजा:
- पेट भरा हुआ होता है लेकिन Craving फिर भी आती है| यानी:भूख पेट की नहीं… दिमाग की चाल है।
सरल उदाहरण (Simple Example)
आपने खाना खा लिया — पेट भरा है पर Fridge में मीठा दिखा दिमाग बोला — “बस थोड़ा सा…”
आपने खा लिया फिर बोला — “थोड़ा और…”और देखते ही देखते पूरा खा लिया
- यह भूख नहीं थी यह डोपामिन का खेल था |
"Craving = दिमाग की चाहत
Hunger = शरीर की ज़रूरत"
![]() |
| Late-night sweet cravings |
(4) Mobile aur Advertisements भी दिमाग को भड़काते हैं
- Instagram पर Cake की Reel मिल गई
- YouTube पर Cheese Pull Video
- Zomato के Notification और
- Shopping mall की Food Smell…
सब दिमाग को Signal देते हैं: “Order kar de!” हम भूल जाते हैं → भूख की वजह स्क्रीन है,पेट नहीं।
(5) Comfort Food का Dangerous Cycle
जब Stress / Sadness आती है →हम Comfort Food लेते हैं →थोड़ा अच्छा feel होता है →फिर guilt →फिर stress →फिर वही food एक बार ये साइकिल स्टार्ट हो गयी तो ये एक Silent Toxic Cycle बन जाती है !
इसका नतीजे:
• Weight Gain
• Heaviness
• Acne
• Low Confidence
• Digestive Issues
• Hormonal Imbalance
(6) घर का खाना Boring क्यों लगता है?
क्योंकि: घर का खाना —बालों की तरह Simple और Junk Food —Film Star की तरह चमकदार!लेकिन चमकदार चीजें…हर वक़्त अच्छी नहीं होतीं।अब ये दोनों खाने बॉडी में क्या क्या काम करते है इसको समझते है
घर का खाना
- Body को Fuel देता है
- Gut को Heal करता है
- Immunity को Strong करता है
Junk food:
- बस दिमाग को Excite करता है
- शरीर को चोट पहुँचाता है
(7) Binge Eating — जब हाथ रुकना मुश्किल हो जाए
कभी कभी अपने देखा होगा की हम कुछ Unhealthy जैसे चिप्स पॉपकॉर्न खाना Start करते है तो हमारा हाथ रुकना मुश्किल हो जाता है औरबस एक ही आवाज़ आती है “बस एक बाइट…”और देखते ही देखते पूरा पैकेट ख़त्म क्योंकि दिमाग का Reward system control छीन लेता हैं!
उदाहरण:
• Movie देखते हुए Popcorn• Series देखते हुए Chips
• Boredom में Biscuit
Mind is Eating → Body is Silent→ Result — ज्यादा Calories, कोई Awareness नहीं।
(8) महिलाओं में Emotional Eating ज्यादा क्यों?
• Hormonal Ups & Downs
• Family Responsibilities
• Work Pressure
• Mood Fluctuations
![]() |
| Emotional eating during stress |
⏹ Women = More Emotional Connect
Society में बचपन से सिखाया जाता है —लड़कियाँ भावनाओं को ज़्यादा महसूस करती हैं। तो जब Stress हो, बहस हो जाए या अकेलापन लगे… तो दिल कहता है —“कुछ अच्छा खा कर Better Feel करो…” खाना उनका Comfort Zone बन जाता है।
⏹ Multitasking + Mental Load
घर, ऑफिस, बच्चे, रिश्ते, सब की जिम्मेदारी… पर खुद के लिए समय? सबसे आखिर में! जब दिमाग Tired हो जाता है, तो Body को चाहिए Instant Relief → और सबसे आसान Option है —Food Reward System:
“मैंने इतना काम किया है… Treat तो बनता है!”
जब महिलाएँ दिन भर थक-थक कर काम करती हैं तो रात में खुद को Gift देती हैं — Ice-cream, Chips, Noodles क्योंकि दिमाग खुशी चाहता है…फिर वही “Feel-Good Food” Habit बन जाता है।
(9) Mindful Eating — दिमाग को Train करना सीखें
हमे खाना खाते टाइम कुछ बातो का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए जैसे:
✸ TV / Mobile बंद कर दें
✸हर Bite 20 बार चबाएँ
✸हर Bite के बीच 10 second रुकें
✸ Swaad को महसूस करें
✸ अपनी Body को Thanks करें
इससे क्या होगा :
• कम खाएँगे
• पेट भरा लगेगा
• Digestion अच्छा रहेगा
• दिमाग Clarity देगा
👉खाना सिर्फ Fuel नहीं —Respect है अपने शरीर के लिए।
![]() |
| Mindful eating for better control |
(10) Cravings Control करने के 10 आसान Tips
- पानी पिएँ – कई बार प्यास को भूख समझ लेते हैं
- नींद पूरी करें
- Stress को Walk / Music से Release करें
- Healthy Snacks Ready रखें
- Slow Eating करें
- Emotional Triggers पहचानें
- दिन में 20–30 मिनट Sunlight
- Fast-food को घर में कम रखें
- Sugar कम, fruits ज्यादा
- खाना plate में पहले सलाद
👉छोटा-सा बदलाव →बड़ा फर्क
(11)अपने-आप पर नरमी रखें — सज़ा नहीं
अगर गलती से जंक खा लिया तो Guilt क्यूँ? आप इंसान हैं…रोबोट नहीं !
यह Journey Perfection की नहीं, Progress की है
👉खुद पर गुस्सा नहीं, pyaar करें ।क्यूंकि Body को Punishment नहीं — Care चाहिए ।
अंतिम शब्द — Healthy खाना boring नहीं होता
- ये Simple होता है
- ये Indian होता है
- ये घर का होता है
- ये प्यार से बना होता है
आज से बस एक छोटा वादा:
👉 जहाँ पेट भूखा हो — खाना खाएंगे
👉 जहाँ मन भूखा हो — खुद से बात करेंगे
👉 दिमाग को नहीं — body को जीतने देंगे
आप deserve करते हैं —
Glow, Confidence, Energy aur Happy Life
और ये सब वहीं से आता है जहाँ Food Comfort नहीं — Self-Love बन जाए
👉 Emotional eating से बाहर निकलने और real hunger को समझने के लिए habit tracker एक simple लेकिन powerful tool है:- https://amzn.to/4aYsOUG
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Emotional Eating क्या होती है?
Emotional Eating तब होती है जब हम भूख न होने के बावजूद तनाव, उदासी, बोरियत, गुस्सा या अकेलेपन में खाना खाते हैं। इसमें खाना ज़रूरत नहीं बल्कि emotion को शांत करने का तरीका बन जाता है।
2. Real Hunger (असली भूख) क्या होती है?
Real Hunger शरीर की natural ज़रूरत होती है। इसमें पेट में हल्की गड़गड़ाहट, कमजोरी, सिर दर्द या energy low महसूस होती है और किसी भी simple food से भूख शांत हो जाती है।
3. Emotional Hunger और Real Hunger में फर्क कैसे पहचानें?
-
Emotional Hunger अचानक आती है
-
खास food (मीठा, junk) की craving होती है
-
खाने के बाद guilt महसूस होता है
जबकि Real Hunger:
-
धीरे-धीरे आती है
-
कोई भी संतुलित खाना स्वीकार्य होता है
-
खाने के बाद संतोष मिलता है
4. Stress और Anxiety का Emotional Eating से क्या connection है?
Stress और Anxiety में शरीर cortisol hormone release करता है, जो sugar और high-calorie foods की craving बढ़ा देता है। यही वजह है कि तनाव में मीठा या तला-भुना खाने का मन करता है।
5. Emotional Eating Weight Gain का कारण बन सकती है?
हाँ। बार-बार बिना भूख के खाना extra calories जोड़ता है, जिससे weight gain, belly fat और digestion issues हो सकते हैं।
6. Emotional Eating को कैसे control करें?
-
अपनी emotions पहचानें
-
खाने से पहले खुद से पूछें: “क्या मैं सच में भूखी हूँ?”
-
Stress management habits अपनाएँ
-
Balanced meals और proper routine follow करें
7. क्या Emotional Eating Hormonal Problems से जुड़ी होती है?
हाँ। PCOS, thyroid और insulin resistance जैसी conditions में emotional eating ज़्यादा देखी जाती है क्योंकि hormones cravings को trigger करते हैं।
8. Mindful Eating क्या है और यह कैसे मदद करती है?
Mindful Eating का मतलब है ध्यान से, बिना distraction के खाना। इससे आप अपनी भूख और emotions को बेहतर समझ पाती हैं और overeating कम होती है।
9. क्या Emotional Eating पूरी तरह खत्म की जा सकती है?
पूरी तरह खत्म करना ज़रूरी नहीं, लेकिन awareness और सही habits से इसे काफी हद तक control किया जा सकता है।
10. Emotional Eating से बाहर निकलने में कितना समय लगता है?
यह व्यक्ति पर depend करता है। Regular routine, balanced diet और self-awareness से कुछ ही हफ्तों में improvement दिखने लगती है।
📚 मेरी Books पढ़ें
1️⃣ Cravings Control Guide (Winter Edition)
अगर आपको Emotional Eating control करने में दिक्कत होती है, तो ये Winter Cravings & Weight Loss Guide Book आपके बहुत काम आएगी।
Book link: https://amzn.in/d/gm5xl1m
2️⃣ Healthy Breakfast Recipes Book
सुबह का सही नाश्ता पूरे दिन की energy, mood और cravings को control करता है। अगर आप रोज़ सोच में पड़ जाते हैं कि आज नाश्ते में क्या बनाऊँ? ये book आपके लिए बहुत useful है।
Book Link: https://amzn.in/d/3CVh1Cq
मेरे Blogs पढ़ें
Healthy Dinner Ideas for Weight Loss
Dinner सही होगा तो overeating automatically कम हो जाएगी 👇
Blog Link : https://www.alinawellnesshub.com/2025/11/low-calorie-indian-dinner-recipes-weight-loss.html
Sugar Cravings Control Tips
अगर आपको बार-बार sweet cravings होती हैं, तो इस blog में quick & simple Indian hacks दिए गए हैं
Blog Link: https://www.alinawellnesshub.com/2025/11/sugar-craving-control-guide-indian-routine-diet-ti.html
निष्कर्ष (Conclusion)
हम अकसर समझते हैं कि हमारी खाने की आदतों का संबंध सिर्फ पेट और भोजन से है, लेकिन असल बात यह है कि खाना हमारी भावनाओं, यादों और दिमाग से कहीं ज्यादा जुड़ा होता है। जब हम यह पहचानना शुरू कर देते हैं तो क्या होता है:
कौन-सी भूख शरीर की है और कौन-सी भूख मन की है तो हम अपनी Plate नहीं, अपनी ज़िन्दगी को Control करना सीख जाते हैं।
याद रखिए…
जंक फ़ूड बस कुछ मिनटों की खुशी देता है, लेकिन सही खाना — लम्बे समय की सेहत, Energy और आत्मविश्वास देता है। आपकी Body हर दिन आपके लिए काम करती है, आपको चलाती है, हँसाती है, सपने पूरे करने में साथ देती है…तो क्या वह इतनी भी लायक नहीं कि उसे वही दिया जाए जो उसे अच्छा महसूस कराए?
आज से खाना आपका Comfort नहीं —आपकी Self-Care बनना चाहिए।
आप deserve करते हैं —
- हल्की-फुल्की Body
- साफ़ Skin
- खुश Mood
- ताज़गी भरी Energy
- और एक खूबसूरत, Confident Life
बस हर दिन एक छोटा-सा फैसला करें:
👉 “मैं अपने दिमाग की Cravings नहीं, अपने शरीर की ज़रूरत सुनूँगी।”
यही एक छोटी-सी आदत आपको बहुत बड़ी Wellness Journey पर ले जाएगी।
👉Healthy lifestyle, balanced nutrition और natural wellness से जुड़े और blogs पढ़ने के लिए हमारे Home Page पर ज़रूर visit करें।
#EmotionalEating
#MindfulEating
#CravingsControl
#FoodPsychology
#WomenWellness
#HealthyIndianDiet
#StressEating
#EatForBodyNotMood
✍ About the Author : Alina Siddiqui
मैं Alina Siddiqui, Nutrition & Wellness Blogger हूँ। मैं Nutrition & Dietetics में M.Sc. हूँ और Food & Wellness niche में काम कर चुकी हूँ। मेरा उद्देश्य है कि हर व्यक्ति अपने रोज़मर्रा के खाने में छोटे-छोटे बदलाव करके बेहतर सेहत पा सके। मैं यह मानती हूँ कि “अच्छी सेहत किसी फैन्सी डाइट से नहीं, बल्कि हमारी रोज़ की थाली से बनती है।”
मेरे ब्लॉग पर आप पढ़ेंगे —
• वजन नियंत्रित रखने में मदद करने वाले भारतीय नाश्ते और भोजन
• सरल और वैज्ञानिक आधार पर आधारित हेल्दी ईटिंग हैबिट्स
• मौसम और लाइफ़स्टाइल के अनुसार भोजन चुनने के तरीके
• रोज़मर्रा में अपनाने योग्य wellness routines
मेरा मकसद है सेहत को simple, स्वादिष्ट और sustainable बनाना, ताकि हर कोई अपनी ज़िंदगी में हेल्दी बदलाव ला सके।
Healthy ideas & tips के लिए Pinterest पर Follow करें: https://in.pinterest.com/alinawellnesshub/
Healthy ideas & tips के लिए Whatsaap चैनल पर Follow करें: https://whatsapp.com/channel/0029VbBrkgQ2ER6qoI6GKk23
Daily health & wellness tips के लिए Telegram चैनल join करें: https://t.me/+A7MlklxwPatkZWQ1
📩 सहयोग या किसी भी प्रश्न के लिए संपर्क करें:
Email:- alinasiddiqui4@gmail.com
👉 Full Disclaimer पढ़ें



.jpg)


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
“Apne thoughts aur experiences comment me share karein , Aapki baatein kisi aur ke liye motivation ban sakti hain!”