Alina Siddiqui \Alina wellnes Hub
Introduction (परिचय)
हम भारतीयों की थाली में रोटी और चावल सिर्फ खाने की चीजें नहीं हैं, ये हमारी यादों, आदतों और घर की सीख का हिस्सा हैं। फिर भी इनके बारे में सबसे ज़्यादा भ्रम भी इन्हीं के आसपास फैले हुए हैं। बचपन से लेकर आज तक आपने न जाने कितनी बार सुना होगा
“रोटी ज़्यादा मत खाओ, पेट निकल आएगा!”
या फिर
“रात में चावल बिलकुल नहीं… इससे नींद भी भारी और शरीर भी भारी।”
कभी स्कूल की कैंटीन में, कभी हॉस्टल की मेज़ पर, कभी माँ की रसोई में, तो कभी पड़ोसन के साथ शाम की बातें करते हुए हमने ये लाइन्स न जाने कितनी बार सुनी हैं। धीरे-धीरे ये बातें इतनी अंदर तक उतर गईं कि अब हम खुद भी ये मानने लग गए कि रोटी थोड़ी सी भी ज़्यादा खा ली तो मोटे हो जाएंगे, और चावल रात में खाया तो जैसे कोई बड़ी गलती कर दी। पर क्या कभी हमने रुके और सोचा:-
ये सब सच में कितना सच है?
असल में, हमारे खाने के बारे में बहुत सी बातें “फ़ीलिंग”, “सुनी-सुनाई बातें” और “परंपरा के असर” पर बनी होती हैं। कभी किसी को रोटी भारी लगती है, कभी किसी को चावल हल्का… कभी किसी को रोटी से ज़्यादा तृप्ति मिलती है, कभी चावल की एक प्लेट से सुकून मिलता है। पर इन अनुभवों से एक मिथ बन गया:-
रोटी = भारी
चावल = वजन बढ़ाने वाला
लेकिन क्या यही असली सच है? या फिर हम बस पुराने डर और धारणाओं को सच समझ बैठे हैं?
“अगर आप रोज़मर्रा की खाने की आदतों को थोड़ा अधिक संतुलित और practical बनाना चाहते हैं, तो ‘Healthy Eating on a Budget in India’ वाला मेरा ब्लॉग ज़रूर पढ़ें। इसमें आसानी से टिकने वाली और pocket-friendly healthy choices को simple तरीके से समझाया है, जिससे आपकी plate अपने-आप balanced होने लगती है।”
Blog Link:- https://www.alinawellnesshub.com/2025/12/healthy-eating-on-a-budget-india.html
यही जानने के लिए…चलिए इस पूरे मिथ को बहुत सरल भाषा में गहराई से समझते हैं…
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| “Roti and rice are both basic Indian staples, often misunderstood due to common myths.” |
1. रोटी और चावल दोनों ऊर्जा देने वाले खाद्य हैं कोई भी अपने आप मोटा नहीं करता
यह वह सबसे ज़रूरी बात है जिसे लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं। हम बस यह सुन लेते हैं कि “रोटी भारी है” या “चावल मोटा करता है”, और बिना सोचे-समझे मान भी लेते हैं। लेकिन सच्चाई इससे ज़्यादा सरल है।
1. खाना ज़रूरत से ज़्यादा खाया जाए
अगर शरीर को जितनी ऊर्जा चाहिए, उससे ज्यादा हम खा लेते हैं, तो बची हुई ऊर्जा जमा हो जाती है। यही वही स्थिति है जिसे लोग “मोटापा” कह देते हैं जबकि असल में यह अतिरिक्त ऊर्जा का जमा होना है, ना कि किसी खास खाद्य की गलती।
2. चलना-फिरना कम हो
अगर दिनभर की गतिविधि कम है कम चलना, ज्यादातर बैठना, या बहुत sedentary लाइफ तो शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत ही नहीं पड़ती। लेकिन अगर हम खाना उतना ही रखें जितना उस दिन ज्यादा चलने-फिरने वाले दिन खाते हैं, तो स्वाभाविक है कि ऊर्जा का उपयोग कम होगा और जमा ज्यादा। इसका मतलब यह नहीं कि रोटी भारी है या चावल गलत बस शरीर की जरूरत के हिसाब से खाना एडजस्ट न करना ही असंतुलन पैदा करता है।
3. प्लेट में सब्ज़ियाँ और दाल कम हों
बहुत बार रोटी और चावल नहीं, बल्कि उनके साथ खाया जाने वाला खाना असंतुलन की वजह बनता है। अगर थाली में दाल, सब्ज़ियाँ, सलाद और प्रोटीन कम हों, और रोटी/चावल ज्यादा हों, तो संतुलन बिगड़ता है। लोग कहते हैं “चावल खा लिया इसलिए भारी लग रहा है”जबकि असल में भारीपन सब्ज़ियों और दाल की कमी से आता है, क्योंकि पेट को पचने के लिए विविधता चाहिए।
“अगर आपको अपनी सुबह को थोड़ा आसान, हल्का और हेल्दी बनाना है, तो मैंने अपनी बुक ‘Morning Detox Secrets’ में बिल्कुल simple और घर में होने वाली चीज़ों से बनने वाली detox आदतों को step-by-step समझाया है। इसमें कोई expensive drinks या medical claims नहीं बस ऐसी छोटी आदतें हैं जो skin को naturally glow देती हैं और gut को शांत करती हैं। अगर आप अपनी daily morning routine को थोड़ा better बनाना चाहते हैं, तो इस guide को ज़रूर पढ़ें।”
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4. खाना असंतुलित हो
कभी रोटी के साथ बहुत तेल वाली सब्ज़ी, कभी चावल के साथ तली हुई चीजें… और फिर दोष रोटी–चावल को दे दिया जाता है। जबकि रोटी–चावल तो सालों से वही हैं, हमारी प्लेट का पैटर्न बदल जाता है और असर वहाँ से आता है।
👉गलती रोटी या चावल की नहीं, संतुलन की होती है
रोटी और चावल दोनों ही सरल, सामान्य, रोज़ के खाद्य हैं। ये शरीर को ऊर्जा देते हैं, और ऊर्जा किसी को मोटा नहीं करती। जो भी असर दिखता है, वह हमारी मात्रा, दिनचर्या, प्लेट के संतुलन और खाने के तरीके से आता है।मतलब सीधा सा खाना नहीं, खाने की आदतें फर्क डालती हैं।
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| “Both roti and rice give energy weight gain depends on overall balance, not the food itself.” |
2. रोटी और चावल दोनों अलग–अलग फायदे देते हैं (दोनों अच्छे हैं, कोई दुश्मन नहीं)
अक्सर हम खाने को “अच्छा–बुरा” या “भारी–हल्का” की कैटेगरी में बाँट देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि
रोटी और चावल दोनों ही अपनी–अपनी जगह पर फायदेमंद हैं। दोनों अलग तरह का अनुभव देते हैं, अलग तरह का संतोष देते हैं और अलग तरह से शरीर को ऊर्जा पहुँचाते हैं।इसलिए किसी एक को विलेन और दूसरे को हीरो बनाना गलत है। दोनों हमारे भारतीय खाने का संतुलन बनाते हैं।
रोटी (गेहूँ की रोटी)
1. इसमें फाइबर अधिक होता है
गेहूँ पूरी तरह पिस कर रोटी बनती है, इसलिए इसमें स्वाभाविक रूप से फाइबर रहता है। यह फाइबर खाने को थोड़ा “भरपेट” बनाता है, जिससे रोटी खाने पर पेट ज्यादा संतुष्ट लगता है।
2. भूख जल्दी नहीं लगती
रोटी खाने के बाद भूख देर से लगती है, क्योंकि यह धीरे–धीरे पचती है और लगातार ऊर्जा देती रहती है। कई लोग ऑफिस या मेहनत वाले काम के लिए दोपहर में रोटी को बेहतर मानते हैं क्योंकि यह लंबे समय तक टिकती है।
3. पचना धीमा है, इसलिए ऊर्जा धीरे–धीरे मिलती है
रोटी शरीर को “slow release” वाली ऊर्जा देती है, यानी तुरंत भूख नहीं लगती और व्यक्ति लंबे समय तक एक्टिव महसूस करता है।
4. दोपहर के खाने में बहुत लोगों को बढ़िया लगती है
क्योंकि दोपहर में शरीर को काम के लिए स्थिर और लंबे समय वाली ऊर्जा चाहिए, रोटी उस समय कई लोगों को ज़्यादा सूट करती है।
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| “Roti provides fiber and long-lasting energy when eaten with vegetables and dal.” |
चावल (सादा चावल या भात)
1. यह हल्का होता है
चावल में पानी की मात्रा ज़्यादा होती है और बनावट नरम होती है। इसलिए चावल खाने पर पेट भरा हुआ तो लगता है लेकिन भारीपन नहीं होता।
2. जल्दी पच जाता है
कई लोगों को शाम या रात में चावल इसीलिए अच्छे लगते हैं क्योंकि शरीर को राहत मिलती है और पाचन पर दबाव नहीं पड़ता।
3. रात के खाने में आराम देता है
रात का समय शरीर के शांत होने का समय है, और ऐसे में हल्का भोजन शरीर को सुख देता है। इसलिए बहुत से लोग चावल को रात के खाने के साथ जोड़ते हैं।
4. जिनको गैस/अपच की समस्या होती है, उन्हें अक्सर चावल ज़्यादा सूट करता है
चावल मुलायम, हल्का और आसानी से पचने वाला होता है, इसलिए कई लोगों को पेट में जलन, भारीपन या गैस जैसी असहजता में चावल बेहतर महसूस होता है।
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| “Rice is light, easy to digest, and suitable for people with digestive discomfort.” |
👉रोटी और चावल दोनों अच्छे हैं, बस उनका काम अलग–अलग है
रोटी भरपूर और धीरे–धीरे मिलने वाली ऊर्जा देती है। चावल हल्का, आराम देने वाला और आसानी से पचने वाला भोजन है।
कोई भी दुश्मन नहीं है, दोनों बस शरीर और दिनचर्या के हिसाब से अलग भूमिका निभाते हैं। कभी रोटी सही लगती है, कभी चावल और यही संतुलन भोजन को खूबसूरत बनाता है।
3. “रात में चावल मत खाओ” वाली बात आखिर आई कहाँ से?
ये लाइन हम सबने कभी न कभी ज़रूर सुनी होगी “रात में चावल मत खाना, इससे वजन बढ़ता है।” पर क्या आपने कभी सोचा कि ये मान्यता शुरू कहाँ से हुई? क्योंकि आज के समय में यह बात उतनी लागू नहीं होती जितनी पहले के दौर में होती थी।
पुराने समय की सोच कैसे बनी?
1. उस समय रात में लोग बहुत कम चल–फिर पाते थे
ज़माना अलग था। बिजली कम थी, टीवी–मोबाइल जैसे मनोरंजन नहीं थे। सूरज ढलते ही लोग आराम मोड में चले जाते थे। रात का अधिकतर समय बैठकर या लेटकर बीतता था। इसलिए रात का खाना अगर ज़्यादा भारी हो जाता, तो शरीर को उसे पचाने में थोड़ा समय लगता। ऐसे में लोग चावल को “हल्का नहीं” बल्कि “ज्यादा खाने लायक” मान लेते थे।
2. पूरा दिन खेत, फैक्ट्री या मेहनत वाले काम में बीतता था
पहले लोग सुबह से शाम तक शारीरिक मेहनत करते थे खेतों में काम, जानवरों की देखभाल, लकड़ी काटना, घर–आँगन के बड़े काम… इस वजह से पेट में भूख ज्यादा लगती थी और रात का खाना अक्सर काफी मात्रा में खाया जाता था। ऐसे में अगर रात का खाना चावल अधिक मात्रा में खा लिया जाए, तो पेट ज़्यादा भरा–भरा लगता था, और लोग सोचते थे कि “चावल भारी है।”
3. रात का खाना आमतौर पर दिन की तुलना में ज्यादा होता था
पूरा दिन मेहनत का इसलिए रात में लोग चावल के साथ ढेर सारी दाल, सब्ज़ी, घी, और घर की रेसिपियाँ खा लेते थे। समस्या चावल की नहीं, उस ज्यादा मात्रा की थी जो पेट को भारी महसूस कराती थी। धीरे–धीरे लोगों ने यह मान लिया कि दोष चावल का है, जबकि असल में यह प्लेट भरने का तरीका था जिसने यह मिथ बना दिया :-
“रात में चावल मत खाओ।”
लेकिन आज के समय में हालात बदल चुके हैं
आज की दुनिया पुराने समय जैसी नहीं रही। हमारे काम, रूटीन, दिनचर्या और खान–पान का तरीका सब बदल चुका है।अगर कोई सही मात्रा में चावल खाता है और उसके साथ दाल, सब्ज़ी, सलाद भी लेता है और भोजन संतुलित रहता है तो रात में चावल खाना बिल्कुल ठीक है। आज चावल उतना भारी नहीं लगता क्योंकि हम उतनी अधिक मात्रा में नहीं खाते जितनी पहले खाई जाती थी।
चावल की बुराई नहीं, उसकी मात्रा की बुराई है
समस्या चावल नहीं बनता, बल्कि तब बनती है जब:
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प्लेट बहुत बड़ी हो
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सब्ज़ी–दाल कम हों
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और चावल बहुत ज्यादा ले लिया जाए
अगर मात्रा संतुलित है, तो रात में चावल खाना किसी भी तरह से गलत नहीं है। चावल गलत नहीं गलत है पुराने डर को आज तक ढोते रहना।
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| “Eating rice at night is not harmful the key is portion control and a balanced plate.” |
4. किससे वजन बढ़ता है? रोटी से या चावल से?
यह सवाल लगभग हर घर में उठता है। कभी किसी को लगता है कि रोटी मोटी कर देती है, कभी किसी को लगता है चावल ही सारी समस्या की जड़ है। लेकिन सच क्या है?
सच बहुत सीधा है वजन न रोटी बढ़ाती है और न चावल। वजन बढ़ाता है आपकी प्लेट का असंतुलन।
अक्सर हम किसी एक खाद्य को दोष दे देते हैं, लेकिन असल मायने में बात उस चीज़ की नहीं होती, बल्कि यह होती है कि आप उसे किस तरह और कितनी मात्रा में खा रहे हैं।
“अगर आपको लगता है कि रोटी या चावल जल्दी भूख लगा देते हैं, तो इसका एक आसान समाधान Volume Eating है। मेरे ब्लॉग ‘Volume Eating: कम कैलोरी में पेट भरे – स्मार्ट भारतीय थाली गाइड’ में मैंने बताया है कि कैसे आप अपनी प्लेट में सिर्फ कुछ smart add-ons (जैसे सलाद, sautéed सब्ज़ियाँ, clear soups, high-fiber sides) जोड़कर कम कैलोरी में पेट भर सकते हैं। इस तरीके से रोटी और चावल दोनों ही आसानी से digest होते हैं और heavy भी नहीं लगते। अगर आप अपनी plate को बिना dieting के naturally बड़ा और संतुलित बनाना चाहते हैं, तो यह guide ज़रूर देखें।”
Blog Link:- https://www.alinawellnesshub.com/2025/11/volume-eating-smart-indian-thali-guide.html
वजन तब बढ़ता है जब आपकी प्लेट असंतुलित हो जाती है
किसी भी भोजन में संतुलन ज़रूरी है। अगर यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो शरीर उतनी ऊर्जा खर्च नहीं कर पाता, और धीरे–धीरे वह ऊर्जा जमा होने लगती है।
1. कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा हों
चाहे रोटी हो या चावल अगर प्लेट में सिर्फ यही दोनों चीजें ज़्यादा हों, और सब्ज़ी–दाल कम, तो शरीर को एक जैसा खाना अधिक मात्रा में मिलता है, जिससे संतुलन टूटता है। समस्या चावल/रोटी नहीं, बल्कि उनकी “मात्रा का ज़्यादा होना” है।
2. दाल और सब्ज़ी कम हों
यह सबसे बड़ी गलती है जो बहुत लोग करते हैं। प्लेट में 3–4 रोटी या बड़ा कटोरा चावल, लेकिन दाल एक छोटी सी कटोरी, और सब्ज़ी बस नाम भर। ऐसे में पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता। जब दाल, सब्ज़ी और प्रोटीन कम होते हैं, तो शरीर रोटी/चावल को ज्यादा खा लेता है, और यहीं से असंतुलन शुरू होता है।
3. तेल/घी ज़रूरत से अधिक हो
रोटी–चावल तो साधारण खाद्य हैं, लेकिन अगर इनके साथ तली हुई चीजें, तेल–घी में तैरता हुआ खाना या बहुत भारी ग्रेवी खाई जाए तो पेट जल्दी भारी लगता है और ऊर्जा भी ज्यादा जमा होती है। दोष फिर चावल को मिल जाता है, जबकि असल में प्लेट में तेल ही ज़्यादा था।
4. दिनभर की गतिविधि कम हो
अगर दिनभर बैठकर काम किया, कम चले–फिरे, और शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं हुई तो जो भी खाएँगे, वह धीरे–धीरे जमा होगा। यह बात रोटी और चावल दोनों पर लागू होती है। कम चलना–फिरना भी असंतुलन का हिस्सा है, ना कि किसी एक भोजन की “गलती”।
👉वजन भोजन से नहीं, भोजन के पैटर्न से बढ़ता है
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अगर प्लेट संतुलित है,
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मात्रा सही है,
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सब्ज़ी–दाल पूरी है,
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और गतिविधि ठीक–ठाक है तो न रोटी वजन बढ़ाती है, न चावल।
वजन बढ़ाता है प्लेट का असंतुलन, आदतें, और जीवनशैली।
रोटी और चावल दोनों हमारी थाली के साथी हैं, दुश्मन कभी थे ही नहीं।
“बहुत बार हमारी प्लेट नहीं, बल्कि हमारी दिनभर की lifestyle imbalance का कारण बनती है। अगर आपकी दिनचर्या बहुत व्यस्त है और आप जानना चाहते हैं कि कम समय में भी शरीर को कैसे फिट रखा जा सकता है, तो आप मेरा ये ब्लॉग पढ़ सकती हैं “Busy Schedule में Fit कैसे रहें” इसमें simple और आसान daily habits बताई गई हैं।”
Blog link: https://www.alinawellnesshub.com/2025/11/it-with-busy-schedule.html
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| “Weight gain happens due to imbalance not because of roti or rice.” |
5. कौन सा कब खाना चाहिए? (एक आसान, practical तरीका)
अक्सर लोग पूछते हैं
- “रोटी खाऊँ या चावल?”
- “दोपहर में क्या सही है?”
- “रात में क्या हल्का पड़ेगा?”
असल में यह फैसला बहुत कठिन नहीं है। बस अपने शरीर की जरूरत, दिनचर्या और पेट की महसूस को समझना होता है। नीचे एक बहुत आसान तरीका दिया है जो हर किसी पर लागू हो सकता है।
अगर आपको देर तक पेट भरा हुआ महसूस करना है → रोटी खाएँ
रोटी में स्वाभाविक रूप से फाइबर मात्रा कुछ अधिक होती है। इससे होता क्या है?
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पेट जल्दी खाली नहीं होता
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खाने के बाद लंबे समय तक तृप्ति बनी रहती है
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जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती
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शरीर को धीरे–धीरे, स्थिर ऊर्जा मिलती रहती है
इसलिए बहुत लोग दोपहर के खाने में रोटी को पसंद करते हैं क्योंकि दिनभर काम, ऑफिस, पढ़ाई या बच्चों की देखभाल में उन्हें लगातार ऊर्जा की ज़रूरत होती है। रोटी ऐसी स्थिति में शरीर को “steady” fuel देती है।
“अगर आप ऑफिस जाने वाली लड़की हैं और आपको रोज़ ‘रोटी खाऊँ या चावल?’ जैसी confusion होती है, तो मेरा ब्लॉग ‘1200 Calorie Indian Meal Plan for Office-Going Girls’ आपके लिए बहुत helpful रहेगा। इसमें बिल्कुल आसान, घर के खाने वाली combinations हैं जिनमें रोटी और चावल दोनों को balanced तरीके से शामिल किया गया है — बिना dieting, बिना gym और बिना heavy meals के। अगर आप समझना चाहती हैं कि एक पूरे दिन की plate को कैसे हल्का, simple और energy-giving रखा जा सकता है, तो यह meal plan आपके काम आएगा।”
Blog link:- https://www.alinawellnesshub.com/2025/11/1200-calorie-meal-plan-office-going-girls.html
अगर आपको हल्का और आराम देने वाला खाना चाहिए → चावल खाएँ
चावल की बनावट नरम होती है, इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, और यह पेट पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालता।
इसलिए चावल खाने के बाद:
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पेट भारी नहीं लगता
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खाने के बाद नींद या आराम सहज महसूस होता है
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पाचन पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता
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गैस/अपच वाले लोगों को राहत मिलती है
बहुत लोगों को रात के खाने में चावल इसीलिए अच्छा लगता है क्योंकि रात का समय शरीर को शांत करने का होता है, और हल्का भोजन उस समय ज्यादा उपयुक्त होता है। कई लोग जिनको सुबह कब्ज रहती है, उन्हें रात का सादा चावल + दाल + हल्की सब्ज़ी काफी आराम देता है।
सबसे ज़रूरी नियम — जो असली खेल बदलता है
रोटी हो या चावल उसे हमेशा दाल + सब्ज़ी + सलाद के साथ खाएँ।
यही आपकी थाली का सही संतुलन बनाता है।
क्यों?
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रोटी/चावल से ऊर्जा मिलती है
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दाल से प्रोटीन मिलता है
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सब्ज़ियों से फाइबर, पानी और पोषक तत्व
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सलाद पाचन को संतुलित करता है और पेट हल्का रखता है
यानी पूरा भोजन एक टीम की तरह काम करता है। अगर टीम पूरी है, तो न रोटी भारी लगेगी, न चावल गलत लगेगा। समस्या तब आती है जब प्लेट में सिर्फ रोटी/चावल ज़्यादा हो और बाकी सब चीजें कम।
👉अपने शरीर को सुनें, और प्लेट को संतुलित रखें
आपका शरीर खुद बताता है कि उसे कब कैसा खाना चाहिए।
अगर भूख ज्यादा है → रोटी अगर हल्कापन चाहिए → चावल और दोनों ही स्थिति में दाल + सब्ज़ी + सलाद ज़रूरी हैं। यही सबसे आसान और practical तरीका है सही भोजन चुनने का।
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| “Choose roti when you need longer satiety and rice when you prefer a lighter meal.” |
अंतिम सच: “रोटी मोटी करती है” यह सिर्फ एक पुराना मिथ है
रोटी को लेकर पीढ़ियों से चली आ रही एक गलतफहमी है कि रोटी मोटी करती है। लेकिन सच यह है कि ना रोटी मोटी करती है, ना चावल। हमारे खाने में रोटी और चावल दोनों ही सदियों से शामिल हैं। दोनो ही घर-घर में रोज खाए जाते हैं… अगर ये सच में मोटा करते, तो आधी भारतीय आबादी हमेशा से ओवरवेट होती जो कि सच नहीं है।
- रोटी अच्छी है — क्योंकि इसमें फाइबर और ऊर्जा दोनों होते हैं।
- चावल भी अच्छे हैं — क्योंकि ये हल्के होते हैं और आसानी से पच जाते हैं।
मोटी करता है केवल एक ही चीज़ “असंतुलित खाना”।
यानी—
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ज़रूरत से ज़्यादा खाना
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दाल–सब्ज़ी कम
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तेल ज़्यादा
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और चलना–फिरना बहुत कम
यही असली वजह है, भोजन नहीं।
जब तक आपकी थाली संतुलित है, जब तक आप दाल, सब्ज़ी, सलाद और सही मात्रा में रोटी/चावल खाते हैं तब तक न रोटी फर्क डालती है, न चावल।
आख़िर में बात बस इतनी सी है: “खाना मोटा नहीं करता, खाने का संतुलन मोटा करता है।”
अगर आप सच में यह समझना चाहते हैं कि रोटी वजन बढ़ाती है या नहीं, तो उसका जवाब सिर्फ अनाज में नहीं बल्कि उसे कैसे बनाया जाता है इसमें छुपा है। Manual roti maker से बनी पतली रोटी न सिर्फ portion control में मदद करती है, बल्कि बिना ज्यादा तेल के हेल्दी खाने की आदत भी बनाती है। सही मात्रा और सही तरीका यही रोटी को वजन बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि balanced diet का हिस्सा बनाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रोटी मोटी करती है — सच या झूठ? (Roti vs Rice का असली सच)
1. क्या रोटी सच में वजन बढ़ाती है?
नहीं। रोटी खुद से वजन नहीं बढ़ाती। वजन तभी बढ़ता है जब खाना ज़रूरत से ज़्यादा खाया जाए या थाली असंतुलित हो।
2. क्या चावल हल्का होता है?
हाँ, चावल जल्दी पच जाता है, इसलिए बहुत लोगों को यह हल्का लगता है। खासतौर पर रात में या पेट में गैस–अपच होने पर चावल आराम देता है।
3. रात में चावल खाना गलत है क्या?
नहीं। अगर मात्रा सही है और साथ में दाल–सब्ज़ी है, तो रात में चावल बिल्कुल ठीक है। गलतफहमी बस पुरानी आदतों से आई है।
4. वजन किससे बढ़ता है—रोटी से या चावल से?
न रोटी से और न चावल से। वजन बढ़ता है ज्यादा खाना + कम एक्टिविटी + तेल–घी की अधिकता + कम सब्ज़ियाँ से।
5. रोटी या चावल—कब क्या खाएँ?
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देर तक पेट भरा रखना है → रोटी
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हल्का खाना है → चावल
दोनों सही हैं, बस प्लेट में दाल–सब्ज़ी ज़रूर होनी चाहिए।
6. क्या डायटिंग में रोटी या चावल बंद करना ज़रूरी है?
नहीं। डायटिंग में बंद करने की नहीं, संतुलित मात्रा की ज़रूरत होती है। थोड़ी रोटी + थोड़ा चावल भी खा सकते हैं।
7. क्या ब्राउन राइस सफेद चावल से बेहतर है?
ब्राउन राइस में फाइबर ज़्यादा होता है, लेकिन सफेद चावल भी गलत नहीं है। जिससे आपका पेट और पाचन आराम में रहे, वही आपके लिए सही है।
8. क्या गेहूं की रोटी ग्लूटेन-फ्री होती है?
नहीं, गेहूं में ग्लूटेन होता है। अगर आपको ग्लूटेन से दिक्कत नहीं है, तो रोटी बिल्कुल सुरक्षित है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
रोटी और चावल दोनों ही हमारे भारतीय भोजन की जड़ें हैं—बचपन की थालियों से लेकर दादी–नानी की रसोई तक। इनमें से किसी एक को “गलत” या “मोटा करने वाला” कहना, हमारे पारंपरिक खान–पान की समझ को अधूरा करना है। सच तो यह है कि शरीर को न रोटी नुकसान पहुँचाती है और न चावल; नुकसान तब होता है जब खाना मात्रा से ज़्यादा, तेल से भारी, या प्लेट असंतुलित हो जाती है।
हम अक्सर एक खाने को दोष देकर असल वजहों को नजरअंदाज कर देते हैं—जैसे कम चलना-फिरना, सब्ज़ियाँ-दाल कम खाना, या बिना सोचे-समझे खा लेना।
इसलिए याद रखिए वजन रोटी या चावल से नहीं बढ़ता, बल्कि हमारी आदतों से बढ़ता है।
अगर आपकी थाली में दाल, सब्ज़ी, सलाद, और सही मात्रा में रोटी या चावल है, तो दोनों ही आपके लिए उतने ही अच्छे हैं। असली सेहत तब आती है जब हम खाने से डरते नहीं, बल्कि उसे समझकर, संतुलन के साथ, प्रेम से खाते हैं।
संतुलित भोजन + सक्रिय जीवन = स्वस्थ शरीर
यही सबसे बड़ा सच है।
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✍ About the Author : Alina Siddiqui
मैं Alina Siddiqui, Nutrition & Wellness Blogger हूँ। मैं Nutrition & Dietetics में M.Sc. हूँ और Food & Wellness niche में काम कर चुकी हूँ। मेरा उद्देश्य है कि हर व्यक्ति अपने रोज़मर्रा के खाने में छोटे-छोटे बदलाव करके बेहतर सेहत पा सके। मैं यह मानती हूँ कि “अच्छी सेहत किसी फैन्सी डाइट से नहीं, बल्कि हमारी रोज़ की थाली से बनती है।”
मेरे ब्लॉग पर आप पढ़ेंगे :-
• वजन नियंत्रित रखने में मदद करने वाले भारतीय नाश्ते और भोजन
• सरल और वैज्ञानिक आधार पर आधारित हेल्दी ईटिंग हैबिट्स
• मौसम और लाइफ़स्टाइल के अनुसार भोजन चुनने के तरीके
• रोज़मर्रा में अपनाने योग्य wellness routines
मेरा मकसद है सेहत को simple, स्वादिष्ट और sustainable बनाना, ताकि हर कोई अपनी ज़िंदगी में हेल्दी बदलाव ला सके।
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